STORYMIRROR

Manjul Singh

Abstract

4  

Manjul Singh

Abstract

पागल लड़की

पागल लड़की

1 min
689

तुम चीजों को

ढूंढ़ने के लिए रोशनी का

इस्तेमाल करती हो

और वो गाँव की पागल लड़की

चिट्ठी का,

वो लीपती है

नीले आसमान को

और बिछा लेती है

धूप को जमीन पर


वो अक्सर चाँद को सजा देती है

रात भर जागने की

वो बनावटी मुस्कान लिए,

नाचती है

जब धानुक बजा रहे होते है मृदंग


वो निकालती है कुतिया का दूध

इतनी शांति से की बुद्ध ना जग जाएं

और पिला देती है

नींद में सोई मछलियों को

उसने पिंजरे में कैद कर रखे है

कई शेर जो चूहों से डरते हैं


वो समझती है

नदी को किसी वैश्या के आंसू

इसलिए वह बिना बालों के धुले

अपनी बकरी को डालती है

मांस के टुकड़े

और मेरी कविता सुनाती है

जिसमें मैंने औरत की देह से

उसके हाथ काट कर

अलग नहीं किये थे!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract