STORYMIRROR

नो लख गाय सुनी हम नंद के

नो लख गाय सुनी हम नंद के

1 min
623


नो लख गाय सुनी हम नंद के, 

तापर दूध दही न अघाने।

माँगत भीख फिरौ बन ही बन, 

झूठि ही बातन के मन मान।

और की नारिज के मुख जोवत, 

लाज गहो कछू होइ सयाने।

जाहु भले जु भले घर जाहु,

चले बस जाहु वृंदावन जानो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics