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इक और किरीट बसे दुसरी दिसि

इक और किरीट बसे दुसरी दिसि

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इक और किरीट बसे दुसरी दिसि लागन के गन गाजत री।

मुरली मधुरी धुनि अधिक ओठ पे अधिक नाद से बाजत री।

रसखानि पितंबर एक कंधा पर वघंबर राजत री।

कोड देखड संगम ले बुड़की निकस याह भेख सों छाजत री।


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