STORYMIRROR

Raskhan Kavya

Classics

0  

Raskhan Kavya

Classics

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

1 min
486


आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी ह्मवै गली 

जमुना जल नहाने।

ओचक आइ मिले रसखानि बजावत बेनू

सुनावत ताने।

हा हा करी सिसको सिगरी मति मैन हरी

हियरा हुलसाने।

घूमैं दिवानी अमानी चकोर सौं और दोऊ

चलै दग बाने।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics