STORYMIRROR

Raskhan Kavya

Classics

0  

Raskhan Kavya

Classics

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

1 min
490


आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी ह्मवै गली 

जमुना जल नहाने।

ओचक आइ मिले रसखानि बजावत बेनू

सुनावत ताने।

हा हा करी सिसको सिगरी मति मैन हरी

हियरा हुलसाने।

घूमैं दिवानी अमानी चकोर सौं और दोऊ

चलै दग बाने।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics