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chandraprabha kumar

Action

4  

chandraprabha kumar

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नम्र वाणी

नम्र वाणी

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 क्रोध से क्रोध नहीं जीता जा सकता

क्रोध को बोध से जीता जा सकता ,

अग्नि नहीं अग्नि से बुझायी जा सकती

अग्नि जल से ही बुझायी जा सकती। 


लोहे से लोहा काटा जा सकता है

पत्थर से पत्थर तोड़ा जा सकता है,

पर कठोर हृदय पिघलाने के लिये

कठोर वाणी नहीं हो सकती कारगर। 


कठोर हृदय नहीं पिघले कठोर वाणी से

कठोर हृदय पिघलता है नरम वाणी से,

अपने जीवन को बनायें आदर्श जीवन

ज्ञान शासित जीवन होता है आदर्श जीवन। 


वही जीवन होता वंदनीय अनुकरणीय

जिस जीवन ने सीखा बड़ों का सम्मान करना ,

बड़ों के शब्द होते नीम के पत्तों के समान

सिद्ध जो होते जीवन के लिये अति हितकर। 


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