नज़राना दिलों का
नज़राना दिलों का
तूझसे दिल की बातें कुछ कह नहीं पाऊं ।
तूझसे ही अपना प्यार छुपाऊं...
कहा हैं तू.. कभी नज़र ना आए..
दिल में मेरे क्यो प्यार की ज्योत जगाए।
आहिस्ता –आहिस्ता तुझे भी प्यार होगा..
ये मेरा दिल तुझी को हर बार समझाए!
तेरे मेरे प्यार की सौगात बन गयी!
रिश्ता ऐसा निखरा हमारा..
नज़र मिलते ही बात बन गयी!
तुम जो आये ज़िंदगी में बात बन गयी!
एहसास दिलों के खुल गए..
मोहब्बत के सिलसिले चल पड़े;
बैठे–बैठे बात प्यार की हमारी
एक अधूरी कहानी बन गयी!
तुम जो आये ज़िंदगी में बात बन गयी!
ज़िंदगी थी हमारी खुली किताब
अब एक राजदार कहानी बन गयी!
कसमें वादे और वफा की राजदार बन गयी!
एक पहेली कहानी की किरदार बन गयी!
तुम जो आये ज़िंदगी में बात बन गयी!

