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Gunjan Johari

Abstract

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Gunjan Johari

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निशानी

निशानी

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सोचती हूं अक्सर एक बात मैं

दिल शीशे का क्यों नहीं होता,

जब टूटता तो आवाज होती

और तोड़ने वाले के हाथ में एक निशानी होती!


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