Mahesh Sharma Chilamchi
Tragedy
लोग बाज़ आते नहीं,
करें निरर्थक बात,
आतंकी नेताओं की,
एक जैसी है जात,
भटके को नहीं समझाते,
बिना बात की बात,
बरगला कर भड़काते,
कहे चिलमची पुचकारे से,
नहीं कटेगा रोग,
दंड भेद की भाषा को ही,
अब समझेंगे लोग।
कर्म वृत्ति
कोरोना शादी.....
परिभाषाएं...
उम्मीद
नूतन किरण
सुरक्षा जतन
कोरोना कोरोना
होरी की मारी ...
अफवाह
निरर्थक लोग
“करोना को बहुत करीब से देखा, लोगों को अपनों से बिछुड़ते देखा। “करोना को बहुत करीब से देखा, लोगों को अपनों से बिछुड़ते देखा।
कुछ दाग नहीं धुलते, कुछ ज़ख्मों की दवा नहीं होती। कुछ दाग नहीं धुलते, कुछ ज़ख्मों की दवा नहीं होती।
भीगे नयनों से देखा मैंने भीषण जल प्रवाह, मृदुल वैभव बहा ऐसे, भीगे नयनों से देखा मैंने भीषण जल प्रवाह, मृदुल वैभव बहा ऐसे,
भारी भीड़ आबादी जहाँ अपनी ही चेष्टा में। निहित करें गौरव वहाँ कोलाहल आवेश में। भारी भीड़ आबादी जहाँ अपनी ही चेष्टा में। निहित करें गौरव वहाँ कोलाहल आवेश में।
अब कोई चेहरा पानीदार नहीं मिलता । किसी का गैरतमंद व्यवहार नहीं मिलता । अब कोई चेहरा पानीदार नहीं मिलता । किसी का गैरतमंद व्यवहार नहीं मिलता ।
किंचित भी तू शर्मिंदा है ? कहता तू खुद को ज़िंदा है? किंचित भी तू शर्मिंदा है ? कहता तू खुद को ज़िंदा है?
नशा कर क्या पाता तुम मानव कर नशा बन जाता दानव। नशा कर क्या पाता तुम मानव कर नशा बन जाता दानव।
किरदारों में नए रूप में ढलते हुए, मैने देखा है औरतों को रोज एक नई औरत बनते हुए... किरदारों में नए रूप में ढलते हुए, मैने देखा है औरतों को रोज ए...
आज हमारा युवा वर्ग क्यों पड़ा हुआ लाचार कहीं। आज हमारा युवा वर्ग क्यों पड़ा हुआ लाचार कहीं।
देश में लोकतंत्र की संवैधानिक विफलता पर चर्चायें चल रही हैं। देश में लोकतंत्र की संवैधानिक विफलता पर चर्चायें चल रही हैं।
अनकही उदासी.. कभी कभी करती है पीछा.. अनकही उदासी.. कभी कभी करती है पीछा..
देखो कैसा समय अब आ गया है आदमी ही आदमी से डर गया है। देखो कैसा समय अब आ गया है आदमी ही आदमी से डर गया है।
बहरूपिया भ्रष्टाचार दिख रहा चारों ओर है, धर्म कर्म का काम करते असल में ये चोर है. बहरूपिया भ्रष्टाचार दिख रहा चारों ओर है, धर्म कर्म का काम करते असल में ये चो...
नसीब में नहीं था एक मुकम्मल जहान पैरों तले जमीन और सिर पर आसमान। नसीब में नहीं था एक मुकम्मल जहान पैरों तले जमीन और सिर पर आसमान।
प्रियजन थे जो हमसे बिछड़े, बन तारे अम्बर पर बिखरे। प्रियजन थे जो हमसे बिछड़े, बन तारे अम्बर पर बिखरे।
सड़कों पर देश जा उभरता लहू उबल रहा , या बह रहा है. सड़कों पर देश जा उभरता लहू उबल रहा , या बह रहा है.
सत्ता हो हासिल जैसे भी कैसे, साम, दाम, दंड ,भेद सभी अपनाते हैं। सत्ता हो हासिल जैसे भी कैसे, साम, दाम, दंड ,भेद सभी अपनाते हैं।
पढ़ पढ़ कर,डिग्री लेकर, बहुत मचाया हमने शोर, पढ़ पढ़ कर,डिग्री लेकर, बहुत मचाया हमने शोर,
गर्भ में चिन्हित की जाने कोशिशें और फिर भ्रूण हत्या के प्रयास,,,,, गर्भ में चिन्हित की जाने कोशिशें और फिर भ्रूण हत्या के प्रयास,,,,,
जब तक इस दुनिया में आप लोगों का मतलब निकालते रहेंगे तब तक ही आप उन लोगों के लिये आंखों जब तक इस दुनिया में आप लोगों का मतलब निकालते रहेंगे तब तक ही आप उन लोगों के ल...