STORYMIRROR

Mahesh Sharma Chilamchi

Abstract

3  

Mahesh Sharma Chilamchi

Abstract

नूतन किरण

नूतन किरण

1 min
235

तिमिर घन है,

आओ जलाएं दिए,

सघन वन है, 


आओ जलाएं दिए,

दिवाकर की रश्मि,

जो घन ढांप ले,


चलो मिल के,

हम सब जलाएं दिए,

तिमिर घन है,


आओ जलाएं दिए,

व्याधि का राज़ ज्यादा,

न चल पाएगा,


भानु नूतन किरण, 

स्वास्थ ले आएगा,

दुःख वेदना जाएंगी,


जग से सारी,

सुफल होंगे तूने,

करम जो किए,


तिमिर घन है,

आओ जलाएं दिए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract