निज भाषा उन्नति
निज भाषा उन्नति
जो भाषा तुम्हारी ताकत है,
उसे बोलने में क्या आफत है?
दिखावे की खातिर बस तुम,
अंग्रेजी को अपनाते हो,
बोलना चाहते हो बहुत पर बोल नहीं पाते हो।
अपनी भाषा जो तुमको भली-भांति आती है,
वो सबके सामने तुमसे ना बोली जाती है।
जापान, चीन, कोरिया सहित दुनिया भर के देश, तनिक ना लजाते निज भाषा से, देते यही संदेश,
कर सकते हो हर काम निज भाषा से,
कमा सकते हो नाम निज भाषा से,
हर क्षेत्र, हर विषय में तुम,
पारंगत हो सकते हो निज भाषा से।
हरिवंश, फ़िराक तो थे अंग्रेजी के शिक्षक,
पर वो ना अपना कर्तव्य भूले,
की सेवा हिन्दी भाषा की,
साहित्य के झूले में उनके सब झूले।
गांधी थे गुजराती, और बंगाली टैगोर थे,
पर एक सूत्र में पिरोया सबको उन्होंने,
जला कर मशाल हिन्दी की।
तुम भी आग डालो उस मशाल में,
जिससे ज्योति जलती रहे,
आभा हिन्दी की बढ़ती रहे,
राजभाषा बन हिन्दी संवरती रहे।
