पुनीत श्रीवास्तव
Children
बच्चे जब सो जाते हैं बदमाशियां लिए आँखों में,
ज़िन्दगी ठहर सी जाती है सुस्त हो के रातों में !
बचपन
नब्बे के दशक ...
नींद
आवाजें !
मच्छरदानी !
गली मोहल्लों ...
ज़िन्दगी!
काँच की गोलिय...
रोमांच!
बचपन !
कोई यहाँ तुम्हारा अपना नहीं है कोई यहाँ तुम्हें समझने वाला नहीं है। कोई यहाँ तुम्हारा अपना नहीं है कोई यहाँ तुम्हें समझने वाला नहीं है।
नृत्य धरा पर करते ख़ूब। कल कल करके नदियाँ बहती, नृत्य धरा पर करते ख़ूब। कल कल करके नदियाँ बहती,
पूरे संसार को एक धागे में पिरोकर रखती है "मां" पूरे संसार को एक धागे में पिरोकर रखती है "मां"
और अच्छे वक्त में अपनाते हैं ना बुरा ना अच्छा वक्त सबका आता है। और अच्छे वक्त में अपनाते हैं ना बुरा ना अच्छा वक्त सबका आता है।
करके पुण्य की कमाई गठरी भरकर जाना हैं,अमूल्य ये तन पाकर, यूँ व्यर्थ नहीं गँवाना है करके पुण्य की कमाई गठरी भरकर जाना हैं,अमूल्य ये तन पाकर, यूँ व्यर्थ नहीं गँव...
जो वायु सेना में मैं जाती, तो उड़ान भरती ऊंची और वहां दुश्मनों के छक्के छुड़ाती जो वायु सेना में मैं जाती, तो उड़ान भरती ऊंची और वहां दुश्मनों के छक्के छुड़ाती
देखो वृक्ष पर कोयल आई, मीठी है इसकी बोली l देखो वृक्ष पर कोयल आई, मीठी है इसकी बोली l
गिरता था जब मैं कभी दौड़कर मुझे उठाती थी चूम कर माथा मेरा सीने से मुझे लगाती थी गिरता था जब मैं कभी दौड़कर मुझे उठाती थी चूम कर माथा मेरा सीने से मुझे लगाती ...
बरखा में दोनों ने मिलकर मस्ती करके बचपन के खूब मजे पाए। बरखा में दोनों ने मिलकर मस्ती करके बचपन के खूब मजे पाए।
जब कोई चीज हमें लेना हो बिन आंसू हम रो देते थे। जब कोई चीज हमें लेना हो बिन आंसू हम रो देते थे।
ग़म न कर रख उम्मीद तू आज़म दुश्मनों को देगा सजा भारत। ग़म न कर रख उम्मीद तू आज़म दुश्मनों को देगा सजा भारत।
मैंने भी विद्या की बांधी गठरी, विद्यालय आज रोने लगी। मैंने भी विद्या की बांधी गठरी, विद्यालय आज रोने लगी।
फिर से उस सावन में बेसुध हो के नाचना है। मचलते हुए नदी के पानी में फिर से अपनी कागज फिर से उस सावन में बेसुध हो के नाचना है। मचलते हुए नदी के पानी में फिर ...
जैसे ही जाना सच यह, ढूँढने लगी मैं वह इंसान। जो है मेरे लिए, जीवन के सच्चे भगवान। जैसे ही जाना सच यह, ढूँढने लगी मैं वह इंसान। जो है मेरे लिए, जीवन के...
अपने अंदर हम ये विश्वास जगाते है, आओ बच्चों एक गीत बनाते है ! अपने अंदर हम ये विश्वास जगाते है, आओ बच्चों एक गीत बनाते है !
सजेगी मधुशाला और छलकेंगे पैमाने फिर ये चांदनी रात हो ना हो सजेगी मधुशाला और छलकेंगे पैमाने फिर ये चांदनी रात हो ना हो
तीव्र उत्साह और कार्य के प्रति उत्साह को प्रकट करें। तीव्र उत्साह और कार्य के प्रति उत्साह को प्रकट करें।
खुद से संघर्ष कर आरंभ से अंत तक. खुद से संघर्ष कर आरंभ से अंत तक.
शिक्षा से बनता हर काम है शिक्षा से मिटता अहंकार है। शिक्षा से बनता हर काम है शिक्षा से मिटता अहंकार है।
हमेशा ही चमकते रहने की, प्रेरणा हैं देते यह चमकते सितारे। हमेशा ही चमकते रहने की, प्रेरणा हैं देते यह चमकते सितारे।