पुनीत श्रीवास्तव
Children
बच्चे जब सो जाते हैं बदमाशियां लिए आँखों में,
ज़िन्दगी ठहर सी जाती है सुस्त हो के रातों में !
बचपन
नब्बे के दशक ...
नींद
आवाजें !
मच्छरदानी !
गली मोहल्लों ...
ज़िन्दगी!
काँच की गोलिय...
रोमांच!
बचपन !
रात दिन दिल को सताये अब यही मंजिलें आज़म मिली बेहतर नहीं। रात दिन दिल को सताये अब यही मंजिलें आज़म मिली बेहतर नहीं।
चल, चलाचल, संग चलाचल बढ़ते जाते अनथक ' नयनसुख। ' चल, चलाचल, संग चलाचल बढ़ते जाते अनथक ' नयनसुख। '
मार्ग भले लंबी पर मंजिल तक जायेगी एक समर्थ और सफल इंसान बनायेगी। मार्ग भले लंबी पर मंजिल तक जायेगी एक समर्थ और सफल इंसान बनायेगी।
सूरज दादा सूरज दादा सुन लो जरा मेरी नादानी। सूरज दादा सूरज दादा सुन लो जरा मेरी नादानी।
जाग मुसाफिर जाग जरा, प्रतिभा अपनी जान जरा। जाग मुसाफिर जाग जरा, प्रतिभा अपनी जान जरा।
इससे यह सीखते हैं कि मेहनत का फल होता हैं अनूप। इससे यह सीखते हैं कि मेहनत का फल होता हैं अनूप।
दुनिया के ठेकों में क्यों तू है इतना डूबा? एक दिन बन जाएंगे यह तेरी सफलता का फंदा। दुनिया के ठेकों में क्यों तू है इतना डूबा? एक दिन बन जाएंगे यह तेरी सफलता का ...
घर से निकलते ही लगता है, मानो धूप हमें जलाती है। घर से निकलते ही लगता है, मानो धूप हमें जलाती है।
एक दिन उसे खेलते समय मिला जादुई चिराग..... जो बहुत था गंदा। एक दिन उसे खेलते समय मिला जादुई चिराग..... जो बहुत था गंदा।
अच्छा किया कभी व्यर्थ नहीं जाता मूल ब्याज समेत लौट कर है आता अच्छा किया कभी व्यर्थ नहीं जाता मूल ब्याज समेत लौट कर है आता
लोक कथाओं मैं बुना हूँ रामायण से भी जुड़ा हूँ लोक कथाओं मैं बुना हूँ रामायण से भी जुड़ा हूँ
सपनों के खातिर हमारे अपने सपने देता त्याग मेरा भाई मेरा अभिमान। सपनों के खातिर हमारे अपने सपने देता त्याग मेरा भाई मेरा अभिमान।
खुश होते हैं वो कितना इक छोटी सी जीत पर। दिल की तंग गली होती नहीं इनके समाज में खुश होते हैं वो कितना इक छोटी सी जीत पर। दिल की तंग गली होती नहीं इनके समाज म...
तब आप स्वार्थ पर काबू पा लेंगे और वास्तविक समझ हासिल कर लेंगे। तब आप स्वार्थ पर काबू पा लेंगे और वास्तविक समझ हासिल कर लेंगे।
विविध है जहां सभी ऐसा अपना देश फिर भी सब एक सूत्र में है बंध जाते विविध है जहां सभी ऐसा अपना देश फिर भी सब एक सूत्र में है बंध जाते
कितना प्यारा लगे मेरा घर, लगता नहीं यहाँ मुझको डर। कितना प्यारा लगे मेरा घर, लगता नहीं यहाँ मुझको डर।
कभी हाथ से रोटी लेकर , चोंच में दबाकर ही उड़ जाता कभी हाथ से रोटी लेकर , चोंच में दबाकर ही उड़ जाता
उड़न तश्तरी आयी थी, चकाचौंध फैलाई थी. उड़न तश्तरी आयी थी, चकाचौंध फैलाई थी.