STORYMIRROR

Neerja Sharma

Abstract

3  

Neerja Sharma

Abstract

नीलगगन

नीलगगन

1 min
185

प्रकृति अपने आप में सम्पूर्ण

इंसान के लिए जीवनदायिनी

नीचे धरती 

ऊपर आकाश 

असीमित- अनंत तक फैला नील गगन 

इसी नील गगन में 

उमड़ घुमड़ बादल 

 मन के उमड़ते भावों की तरह

सीमाहीन क्षितिज तक

.हर रोज निहारूँ 

हर रोज विचारूँ

कितने रूप बदल कर आते 

हर रूप मन को लुभाते 

अद्भुत करिश्मा कुदरत का

ये नील गगन

हमारी इच्छाओं की तरह 

न कोई छोर न अंत

प्रयास अगर करो

बढ़ता ही जाता ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract