Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

निगाह

निगाह

1 min 14.2K 1 min 14.2K

निगाहों ने धोखा, तुम्हीं से है खाया,

निगाहों ने तुमको ही, अपना बताया ।


निगाहें सलामत, तेरे दीद से हैं,

निगाहें सुकून, एक झलक से है पाया ।


निगाहों की किस्मत में, कैसी जुदाई,

निगाहों ने हमको, वफा भी सिखाया ।


निगाहों में आँसु की, वजह मेरी तुम,

निगाहों ने सपना, मोहब्बत दिखाया ।


निगाहें करम गर, निगाहों पे कर दो,

निगाहों ने चाहत, में पलकें बिछाया ।


निगाहों की फितरत, निगाहें समझती,

निगाहों के राहों से, तू दिल में आया ।


निगाहों में सूरत, हसीन चाँद की तुम,

निगाहों ने दिल में, जगह फिर बनाया ।


निगाहों की अपनी, ज़ुबान खास कैसी,

निगाहो ने मंज़िल भी, तुमको बनाया ।


निगाहें भी दिलकश, हसीन जैसे मंज़र,

निगाहों ने कैसे, मुझे भी रूलाया ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Habib Manzer

Similar hindi poem from Drama