नौजवान भारती
नौजवान भारती
निज राष्ट्र की एकता अखंडता पुकारती।
उठो-उठो, जगो-जगो नौजवान भारती।।
दूर करो आतंकवाद
भ्रष्टाचार को खदेड़ दो
गरीबी और अशिक्षा के
दानवों को रौंद दो
आस भरे नयनों से वसुंधरा निहारती।
उठो-उठो, जगो-जगो नौजवान भारती।।
जातिवाद, भाषावाद,
प्रांतवाद के ये सर्प
फन उठा रहे हैं
और डस रहे हैं देश को
इनसे मुक्त करो मुझको माँ भारती गुहारती।
उठो-उठो, जगो-जगो नौजवान भारती ।।
सांप्रदायिकता का दावानल
खाक करे अपना उपवन
इससे पहले सीख हमीं लें
एक देश है, एक वतन
वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश ये धरा संवारती।
उठो-उठो, जगो-जगो नौजवान भारती ।।
करें सृजन, कृतित्व ही हो
एकमात्र ध्येय यहाँ
हम युवा बनायें फिर
आत्मनिर्भर भारत यहाँ
माँ के ऋण को नहीं कभी भी संतति बिसारती।
उठो-उठो, जगो-जगो नौजवान भारती ।।
