नारी
नारी
दुनिया देखेगी उसी नज़र से तुझे,
जिसकी इजाज़त तूने उसे दी है
नहीं किसी के रहमोकरम पर तू,
तुझ पे रहमत तो सिर्फ खुदा की है
अपनी खुद की नज़र से खुद को देख,
रंग सतरंगी नज़र आयेंगे
हौसले रख बुलंद इतने तू
सब इबादत में सर झुकायेंगे
तू तो जननी है इस जहान की
कैसे शक्ति को अपनी भूल सके
तेरे बिन घर कभी भी घर न लगे
कोई बोले यह या न बोल सके
ऐतबार औरों पे क्यूं करना है
अपनी ताकत तुझे ही बनना है
लोग गिरगिट सा रंग बदलेंगे
तुझको अपने ही रंग में ढलना है
तेरी नौका है तेरे हाथों में
देख हवा को ये किधर बहती है
अपनी पतवार को ज़रा सा कस के पकड़
गहरी नदिया भी राह देती है।
