नारी का बलिदान
नारी का बलिदान
नारी के बलिदानों की गाथा।
समझ न सकता जग संसार।
कहने को जग "पुरुष प्रधान" है।
लेकिन नारी जीवन का आधार।
बलिदान हैं उसके युगों युगों से।
नर नारायण पर भारी है।
हर युग में दी कठिन परीक्षा।
संसार चलाने वाली है।
उंगली पकड़ के चलना उसने ही सिखाया।
मां बनकर तुझे उसने ही इस दुनियां में लाया।
कभी बेटी, कभी बहू बनकर।
नारी ने ही परिवार चलाया।
लक्ष्मी, दुर्गा रूप धार कर।
कर सकती जगत का कल्याण।
काली, कालिका रूप धार कर।
दुष्टों का कर देती संहार।
जोधा, लक्ष्मीबाई, जैसे कितने ही रूप लिए।
बनकर मीरा बार बार विष के प्याले हैं पिए।
कभी नारी ने बनकर सावित्री।
पति के प्राण भी बचा लिए।
कभी राजनीति में आकर उसने देश चलाया है।
अपने अधिकारों की खातिर, बस बलिदान कमाया है।
नारी के बलिदानों की गाथा को।
भूल नहीं जग पाया है।
भूल नहीं जग पाया है।
