STORYMIRROR

Seema(Simi) Chawla

Fantasy Inspirational

4  

Seema(Simi) Chawla

Fantasy Inspirational

नाँव

नाँव

1 min
189

इस नाँव की कहानी बड़ी निराली

सुबह बन जाती यह मुसाफ़िरों की सीट

रात में हो जाती यह अकेली 


बड़े आते बच्चों को साथ लाते

बन जाता यह कहानियों का वो पल

जिस में बुनते सभी अपनी धून

संगीत बजता किनारे पे 


उसकी गूंज सुन पाते पानी की लहर में

दिन की धूप जब बनती शाम का अंधेरा 

लगता यही बिस्तर बिछाकर सो जाए हम

पर हम तो मुसाफ़िर है 

फिर चल पड़े अपने रास्ते


नाँव फिर लग जाती किनारे 

अगले दिन नया मुसाफ़िर नयी कहानी

बनाते नाँव को निराली।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy