STORYMIRROR

Seema(Simi) Chawla

Inspirational

3  

Seema(Simi) Chawla

Inspirational

संपूर्ण

संपूर्ण

1 min
637

आज सूरज की ओर देखने से आँखें नहीं झपकती

तेज उसका मुझे यूँ रोशनी से भर दे

की मैं चाँद की चाँदनी बन गयी

आसमान से लेकर ज़मीन तक पहुँचती 

यह सफ़ेद चादर बुनती नयी उम्मीद की रेखा 

जिसकी सीमा नहीं में नदी बनती

दुनिया की इस गोलाई में 

ढूँढती में एक सूरज की चोटी सी किरण बनती


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational