न दिन है न रात है
न दिन है न रात है
न दिन है न रात है।
कोई तन्हा है न साथ है।
जैसी आँखें वैसी दुनिया।
बस इतनी सी बात है।
कोई है बिल्कुल अकेला।
किसी को सबका साथ है।
किसी ने तन्हाई को झेला।
उनकी सभी से मुलाक़ात है।
किसी को न होती खुशी नसीब।
उनको मिलती खुशियाँ हज़ार।
किसी के कोई होता नहीं क़रीब।
उनसे जुड़ते हैं लोग बार बार।
किसी ने खाए ताने दिल पर।
उनको सिर्फ़ तारीफ़ मिली।
वे नहीं हुए किसी के दिलबर।
फिर भी दुनिया नहीं हिली।
किसी ने पिया ज़हर का क़तरा।
उन्होंने पिया है जाम का प्याला।
उनका तो जग है खुशियों भरा।
किसी ने खाया न एक निवाला।
वे चैन से सोते हैं सारी रात।
किसी के बैचेन हुए हैं दिन।
उनकी खुशियों भरी हर बात।
कोई जागता तारे गिन गिन।
उनको कोई और मिल गया है।
लग गई है प्यार की लगन।
किसी का तो उजड़ ही गया है।
खुशियों से भरा हुआ चमन।
