STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Abstract Tragedy

4  

V. Aaradhyaa

Abstract Tragedy

मूढ़मति सांप्रदायिकता के आसार

मूढ़मति सांप्रदायिकता के आसार

1 min
246

अब इन निः शंक के जुल्मों को,

सहन करना बंद करना होगा !

बनकर कायर और कमज़ोर,

अब रहना बंद करना होगा !


आज जैसे कोई एक हुआ है,

शिकार इनका बेकार में !

इस मूढ़ मति अँधे-बहरे,

सांप्रदायिकता के बाजार में !


अब जहाँ से विरोध के स्वर उठेंगे,

समझो अगला नंबर उसका है!

समझ नहीं आता वो धर्म-निरपेक्ष,

भारत देश अब किसका है !


कोई पूछो जाकर हत्यारों से,

 किस खातिर ये खेल रचा था !

कयूँ हत्या करने से पहले,

 यह बेमतलब का मेल रचा था !


इस घोर अराजकता के,

समय में मानवता को बचाना है!

अल्लाह, ईश्वर, गुरु और भगवन,

सब एक ही है, ये सबको बताना है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract