Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.
Hurry up! before its gone. Grab the BESTSELLERS now.

Javed Ali

Tragedy


4.0  

Javed Ali

Tragedy


मुख कंकाल रह गया शेष

मुख कंकाल रह गया शेष

1 min 22.7K 1 min 22.7K

बचाकर धूम्रपान-अवशेष 

मुख कंकाल रह गया शेष,

धूम्रपान का विष पिया

और ना रहा जीवन शेष, 

बन गया काल 

हो गई मृत्यु अकाल, 

बचाकर धूम्रपान अवशेष

मुख कंकाल रह गया शेष,

बना दिया जीवन को मरण

नहीं समझा जीवन अनमोल, 

लगाकर धूम्रपान पर जोर 

दिया शीघ्र प्राणों को छोड़,

बचाकर धूम्रपान अवशेष 

मुख कंकाल रह गया शेष,

पीछे छोड़ गया जो कुल 

चढ़ गए विषाद की शूल

थी जो उसकी भूल, 

बचाकर धूम्रपान अवशेष

मुख कंकाल रह गया शेष


Rate this content
Log in

More hindi poem from Javed Ali

Similar hindi poem from Tragedy