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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

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Brijlala Rohanअन्वेषी

Romance

मुझपे तो तुम्हारा ही ---

मुझपे तो तुम्हारा ही ---

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मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ,

तुम्हारी ही यादों का मेरे दिल के हर कोने में पेहरा है ,

मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है --2

रिश्ते हमारे निश्छल हैं ,है अटूट हमारा नाता है 

कुछ और न चाहत हमको सिवाय तेरे !

ये दीवाना अब तेरे ही बाँहों में सुकून हरपल पाता है । 

मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ।

मेरे रग- रग में तेरे इश्क़ का चढ़ गया बहुत रंग गहरा है ,

मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है -2

तेरी माँग में सजा रहता हरपल मेरे ही नाम का स्नेह-रूपी सिंदूर सुनहरा है ,

मुझपे भी हरदम सजा रहता तेरे ही नाम का सुरभित सुहागन का सेहरा है -

मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ।

तुझमें ही हरपल खोया रहता राज छिपी बहुत तुझमें ,

 तेरे इश्क की दीवानगी मुझमें समंदर से भी गहरा है।

मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है -- 2



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