मुझपे तो तुम्हारा ही ---
मुझपे तो तुम्हारा ही ---
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ,
तुम्हारी ही यादों का मेरे दिल के हर कोने में पेहरा है ,
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है --2
रिश्ते हमारे निश्छल हैं ,है अटूट हमारा नाता है
कुछ और न चाहत हमको सिवाय तेरे !
ये दीवाना अब तेरे ही बाँहों में सुकून हरपल पाता है ।
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ।
मेरे रग- रग में तेरे इश्क़ का चढ़ गया बहुत रंग गहरा है ,
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है -2
तेरी माँग में सजा रहता हरपल मेरे ही नाम का स्नेह-रूपी सिंदूर सुनहरा है ,
मुझपे भी हरदम सजा रहता तेरे ही नाम का सुरभित सुहागन का सेहरा है -
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है ।
तुझमें ही हरपल खोया रहता राज छिपी बहुत तुझमें ,
तेरे इश्क की दीवानगी मुझमें समंदर से भी गहरा है।
मुझपे तो तुम्हारा ही वह खिलता - मुस्काता चेहरा है -- 2

