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Rajiv Jiya Kumar

Abstract

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Rajiv Jiya Kumar

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मुझे चाँद चाहिए

मुझे चाँद चाहिए

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दिला दे मुझे दिला दे,

वह जो समस्त 

अंधेरे कोने को सजा दे

निराशा के भंवर में

उबलता हर शै जहाँ है

उम्मीदों का दीप जला दे,

मुझे ऐसा एक चाँद चाहिए 

दिला दे मुझे दिला दे।।


वह जिसकी धवल चाँदनी

अरमानों की सिमटती छाया को

गगनचुंबी शिखर बना दे

मचलकर खनक उठे जो

हँसी वह होंठों पर सजा दे,

मुझे ऐसा एक चाँद चाहिए 

दिला दे मुझे दिला दे।।


वह जो अपने शीतलता के शीत से

कुलषित उद्गग को जमा दे

दफन हर खुशी जहाँ 

नवजीवन जोत जला दे,

मुझे ऐसा एक चाँद चाहिए 

दिला दे मुझे दिला दे।

          



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