मतलबी रिश्ते
मतलबी रिश्ते
मतलबी रिश्तों की तो यहाँ, बस एक ही कहानी है,
दिखावटी चेहरे के पीछे, फितरत अपनी छुपानी है,
पुल बांँधते हैं तारीफ़ के, जब काम हो निकलवाना,
उसके बाद इनको बस हमारी कमियांँ ही गिनानी है,
खास बात यह हमें जिन अवगुणों का भान भी नहीं,
उनको हमारे समक्ष लाना इनकी ये आदत पुरानी है,
तोलमोल कर गोलमोल बातें, हाय इनकी मुलाकातें,
समझ ना पाए कोई भी कब ले आती यह सुनामी है,
इनके दिखावटी चेहरों में जाने कितने राज़ पोशीदा,
स्वार्थ दिल में कूट-कूट भरा प्यार तो बस जुबानी है,
साथ देने के नाम पे इनके कदम सदा ही रहते पीछे,
जताते ऐसे जैसे कितनी हम पर इनकी मेहरबानी है,
अपना वक्त अपनी ज़िंदगी ख़र्च कर देते है इन पर,
पर इन्हें परवाह कहांँ बस मतलबपरस्ती निभानी है,
मतलबी रिश्ते, मतलब के धागों से होते हैं जुड़े हुए,
भावना ही गलत हो जहाँ विश्वास तोड़ना लाज़मी है,
मतलब के मीठे शब्द ऐसे कि शहद भी शरमा जाए,
काम निकलवाने की इनकी, तरकीब बड़ी पुरानी है,
ऐसे लोगों का साथ छीन लेती मासूमियत चेहरे की,
बार-बार इन पे विश्वास करना बहुत बड़ी नादानी है,
क्योंकि भावनाओं, एहसासों से, इनका वास्ता नहीं,
इन्हें तो केवल अपने मतलब की पतंग ही उड़ानी है।
