Kavi Martand
Drama
वे गाँव गाँव गली गली
घर घर जाते हैं
खीसें निपोरते हैं
हाथ जोड़ते हैं
मतदान में ले जाते हैं
मत दान में ले जाते है
फिर पाँच बरस तक
मतवाले होकर
मौज उड़ाते हैं।
हिन्दी को नमन
मतदान
परिवर्तन
सोचे मानव समाज एक बार पुनः छोड़ के भेदभाव का मानसिक विकार। सोचे मानव समाज एक बार पुनः छोड़ के भेदभाव का मानसिक विकार।
घोंसले कितने बने मुझ पर उसका अंदाजा नहीं डाल डाल पर नाचे पंछी उस आनंद का ठिकाना नहीं।। घोंसले कितने बने मुझ पर उसका अंदाजा नहीं डाल डाल पर नाचे पंछी उस आनंद का ठिका...
कोई बाल मन सी हसरत उठेगी देखना फूँक मार फिर उड़ाएगा कोई बाल मन सी हसरत उठेगी देखना फूँक मार फिर उड़ाएगा
जिन्होंने मिटाया रात्रि का अंधेरा घना जिन्होंने मिटाया रात्रि का अंधेरा घना
भाई बड़े बड़े व्यापार आ गये सबके अपने अपने॥ भाई बड़े बड़े व्यापार आ गये सबके अपने अपने॥
प्यार की ज़ाम छलकाने के लिये सनम, मैं तुझे देखने के लिये बेकरार हो रहा हूं। प्यार की ज़ाम छलकाने के लिये सनम, मैं तुझे देखने के लिये बेकरार हो रहा हूं।
खास की मन को मिल जाये, शांति उपहार पर खत्म नहीं हो रहा है, साखी का इंतजार खास की मन को मिल जाये, शांति उपहार पर खत्म नहीं हो रहा है, साखी का इंतजार
धर्म पे लड़ो - मरो , जंगल का सबसे बड़ा ये मुद्दा है जंगल उस ओर बढ़ रहा जहाँ नफरत का गड्ढा है धर्म पे लड़ो - मरो , जंगल का सबसे बड़ा ये मुद्दा है जंगल उस ओर बढ़ रहा जहाँ नफर...
सबसे प्रेम से रहो, प्रेम जिंदगी बही सुबह निकल गई, बस रात रह गई सबसे प्रेम से रहो, प्रेम जिंदगी बही सुबह निकल गई, बस रात रह गई
नहाने में भी हो जाती, आनाकानी सर्दी रानी करती, बहुत ही शैतानी नहाने में भी हो जाती, आनाकानी सर्दी रानी करती, बहुत ही शैतानी
क्या जुदा ही होने को बेटी बाबुल के घर में पलती है? क्या जुदा ही होने को बेटी बाबुल के घर में पलती है?
बन कर कदम बढ़ाता, वृक्ष साथी हमारा साथ दे जाता...! बन कर कदम बढ़ाता, वृक्ष साथी हमारा साथ दे जाता...!
अपने अधूरे-बिखरे सपनों को अपने हाथों से सजाना चाहती हूँ। अपने अधूरे-बिखरे सपनों को अपने हाथों से सजाना चाहती हूँ।
याद आते ही पुरानी यादें, हृदय में चुभते कांटे याद आते ही पुरानी यादें, हृदय में चुभते कांटे
कोशिश की तमन्ना है, मेहनत का एक वादा है। किसी मंज़िल को पाने का….. कोशिश की तमन्ना है, मेहनत का एक वादा है। किसी मंज़िल को पाने का…..
यह कैसा है मिलन और कैसी जुदाई यह कैसा है मिलन और कैसी जुदाई
किसी मंज़िल को पाने का, अब मन में इरादा है, किसी मंज़िल को पाने का, अब मन में इरादा है,
हर ओर से निराश लोग, सुने राय लगा ले, आप यहां पर ठेला चाय हर ओर से निराश लोग, सुने राय लगा ले, आप यहां पर ठेला चाय
खास कानून की मजबूत होती कोई बेंत। हमारे स्वार्थ की बलि न चढ़ता, बेचारा पेड़। खास कानून की मजबूत होती कोई बेंत। हमारे स्वार्थ की बलि न चढ़ता, बेचारा पेड़।
थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है, साखी सोच ज्यादा के चक्कर मे हुई, बहुतों की मौत थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है, साखी सोच ज्यादा के चक्कर मे हुई, बहुतों की मौत