मतभेद एवं मनभेद
मतभेद एवं मनभेद
मतभेद मिटाये जा सकते पर मनभेद छिपाये जाते,
मतभेद जायज हैं क्योंकि सिक्के के दो पहलू होते,
मतभेद विचार,व्यवहार,आचरण तर्क,सोच से होते,
पर मनभेद तो सोच समझकर पैदा किये जाते,
मनभेद हो जाते कभी ईर्ष्या, जलन,आपसी मनमुटाव से,
मतभेद बालसुलभ भी होते और अहंकारी भी होते,
तृतीय पक्ष की मध्यस्थता से मतभेद सुलझाए भी जा सकते,
मनभेद तो व्यापक रूप लेकर रूह तक जड़े फैलाते,
मनभेद माँ-बाप भाई-भाई,यारी- दोस्ती में भी फूट डलवाते,
फ्लस्वरूप अपहरण,हत्या,चोरी जैसे कारनामें अंजाम लेते,
मतभेद या मनभेद दोनों रूप ही इंसान का व्यवहार बताते,
हानि तो स्वयं की ही होनी भले ही इनका कोई भी रूप अपनाये।
