मसला - एय - इश्क
मसला - एय - इश्क
इश्क है अगर मुझसे तो उसका जिक्र भी जरूरी है कि
जैसे अल्लाह की इबादत को घुटनों पे आना जरूरी है
मैं नहीं चाहता के तू बर्बाद हो जाये मगर जब प्यास लगती है
तो महज इक बूंद पूरी है निकल घर से और
कर ये ऐलान दुनिया में के सभी को दिल चाहना हाय मेरी मजबूरी है ।
इश्क है अगर मुझसे तो उसका जिक्र भी जरूरी है
गये सब तख्लिया कह के हुई
कुछ मुश्किलें होंगी के जो थक गये रास्ते में,
यकीनन वो हिम्मतवर नहीं होंगे
इश्क है अगर
मुझसे तो उसका जिक्र भी जरूरी है।

