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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Inspirational

मृत्यु विजय

मृत्यु विजय

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मृत्यु पर विजय है वही पा सका 

जो परहितार्थ उत्सर्ग कर सका 

मृत्यु जीव जन्म का है ध्रुव सत्य 

यही प्रभुवाणी गीता का है तथ्य


जो आया है सो जायेगा ये तकदीर

तदवीर करें कैसी राजा रंक-फकीर 

कठोपनिषद में है नचिकेता कहानी

उद्दालकसुत दृढ़ता,धर्म की जुबानी


पिता को बृद्ध गायें दान में देते देख

नचिकेता विवेक ने किया हठ रेख 

तात !क्या दान में देना शोभा देता

क्या कोई अशक्त बीज खेत बोता


नचिकेता पिता से फिर-फिर पूंछते

आप बताये मुझे किसे दान में देते? 

पिता बोले यमराज को तुझे सौंपता

5वर्षीय अबोध ले प्रण निकल देता 


दृढ़संकल्पी दिवस3 यमद्वारे की प्रतीक्षा

तब यमराज ने सुन ,की उसकी समीक्षा

पुत्र तुम हो महान,देता तुमको 3 वरदान 

जा वापस पिता पास,क्रोध कपूर हो मन

पिता पा भौतिक चीजें जीवन खुश होयें


अग्निविद्या का दें ज्ञान इंसा सुखी होये

लाल तुम अपने को कुछ मांगा न पाये

जीवन-मृत्यु रहस्य आप मुझे समझाये

जिससे प्राणी मुक्त हो परमधाम जायें


वत्स इंसान में विराजित मुक्ति व बन्धन

पार करें जीव सत्कर्म परहित अभिनंदन 

सत्कर्म, संयमी ,धीरजी पायें मुक्तिबोध

सत्कर्म ही लेखनी नचिकेता मृत्यु शोध।


कृष्णभावनामृत जन दिव्य जीवन को

एक क्षण में तुरंत प्राप्त कर है सकता  

कर्मपथ हो मुक्तिपथ ,या हो भक्तिपथ 

दृढ़ तीव्रता पहुंचाती लक्ष्य के विजयपथ।

    




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