STORYMIRROR

राही अंजाना

Abstract

3  

राही अंजाना

Abstract

मररमत उसूलों की

मररमत उसूलों की

1 min
247

मरम्मत उसूलों की करनी अभी बाकी रह गई, 

कहीं सच के मुँह पर लगी झूठी चाबी रही गई, 


बना तो लिए बर्तन सोने चाँदी के भी कारीगर ने,

के अमीरी में गरीबी की थाली यूँही खाली रह गई, 


आईने में देखनी सूरत खुद ही की साकी रह गई, 

गुनाहों की मांगी थी शायद अधूरी माफ़ी रह गई।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract