STORYMIRROR

Listeners Love

Romance Inspirational

4  

Listeners Love

Romance Inspirational

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है.....

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है.....

2 mins
329

महबूब की बातों में जब ना हो जिक्र

उनको ना महसूस हो आपकी फिक्र

साथ रहते पर भी लगे होने अलगाव

मन से मन का ना रहे कोई लगाव

सुकून हो, गर दो पल तन्हा होने पर

बातें भी ना गवारा लगे उसकी अगर

मान भी जाओ अब,

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है।


उचट जाए, जब मन पुरानी यादों से

घृणा हो जाए, उनके दीदार मात्र से

स्पर्श उनका अब अनजाना हो गया

जन्मों का साथ अब बेगाना हो गया

जरा सा गुस्सा अब सयाना हो गया

खुद ही रूठना और मानना हो गया

मान भी जाओ अब,

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है।


बातें तो हो रही, अब जज्बात नहीं रहे

साथ होकर भी हम अब साथ नही रहे

मचल उठता था मन तेरे एक ख्वाब से

मन तो अब भी वही हैं, ख्वाब नही रहे

समां बनती थी, तेरे आ जाने से जहां

की समां बनती थी, तेरे आने से जहां

ना महफिल हैं, सुकरगुजार नहीं रहे

मान भी जाओ अब,

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है।


झिझक उठता है, मन पुरानी बातों से

ख़ामोशी से पहले इतना प्यार ना हुआ

खोने की उसे,लाख कोशिश करने पर 

दिल टूटा तो,बस तार तार ना हुआ था

जब जोड़ा, मैने खुद को, खुद के लिए

जुड़ा तो मैं पर इतना टूटा ना हुआ था

मान भी जाओ अब,

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है


जिस प्यार से प्यारा संताप हो गया है

उस प्यार की अब पीर पराई हो चली 

उफनाती ये, प्यार से भरी को नदिया

एक अरसे बाद, अब स्थिर हो चली

अब सब खत्म हो चला, बस, मैं ही हूं

तुम और तुम्हारी यादें फीकी हो चली

मान भी जाओ अब,

मोहब्बत बेस्वाद हो चला है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance