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Listeners Love

Romance Classics Fantasy

4  

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बहती हवा....

बहती हवा....

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तुम गुजरती हुई फिज़ा सी क्यूं हों

कभी दो पल ठहरो.......बातें करो


कुछ अंदाज़ा लगे की क्यूं हो तुम,

कभी ठंडी छाव, कभी रूखी सी।


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