STORYMIRROR

महेश जैन 'ज्योति'

Tragedy

3  

महेश जैन 'ज्योति'

Tragedy

मोबाइल

मोबाइल

1 min
182


तार, चिट्ठी, कैमरा, घड़ियां, कलेंडर, खा गया ।

हाथ में जब से हमारे ये मो'बाइल आ गया ।।

है बहुत बेदर्द बचपन को निगलने अब लगा ।

जब से बच्चों‌ के दिलों‌ को ये निगोड़ा भा गया 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy