Dr Jogender Singh(jogi)
Fantasy
मनाही आने की है, तुझको रूबरू,
दुनिया ख़्यालों की, मेरी चटक जाती।
ठहर जाते ख़्वाब हसीन सारे,
नज़र बस तुझ पर अटक जाती।
नींद
गुरु
कैसी दीपावली
आखिरी जेवर
सुबह
भुल्लन
खिड़की की जाल...
विस्तार
बेपनाह
दूर नहीं तू
तम को हरें वरदान दो, मति-मान्य हो मम वंदना तम को हरें वरदान दो, मति-मान्य हो मम वंदना
और मैं उस गुजरते हुये पथिक के पाश में बंध कर आज मंजिल पा लिया। और मैं उस गुजरते हुये पथिक के पाश में बंध कर आज मंजिल पा लिया।
ये बूंदें बेशक उसके ज़ुल्फ़ से छिटकी होंगी, मुझ पर ऐसे हँसती हैं कोई पहचान है क्या? ये बूंदें बेशक उसके ज़ुल्फ़ से छिटकी होंगी, मुझ पर ऐसे हँसती हैं कोई पहचान है क...
हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया हाथ उठाए था कि दिल बैठ गया जाने क्या वक़्त-ए-दुआ याद आया
गंवा बैठी हूँ अपने आप को उनसे, उनकी ज़िंदगी में किसी और के आने के पीछे। गंवा बैठी हूँ अपने आप को उनसे, उनकी ज़िंदगी में किसी और के आने के पीछे।
आँखों में सपना बन जो जाने कितने अरमान सजाता है आँखों में सपना बन जो जाने कितने अरमान सजाता है
दहलीज पार कर नई विचार को अपनाना भी आसमान को छू लेने के समान है। दहलीज पार कर नई विचार को अपनाना भी आसमान को छू लेने के समान है।
अगर मैंने हाथ थाम लिया किसी गैर का तो सोचो वापस लौट कर आओगे कैसे ? अगर मैंने हाथ थाम लिया किसी गैर का तो सोचो वापस लौट कर आओगे कैसे ?
मेरी मोहब्बत की कहानी कब से अधूरी है, मेरी मोहब्बत की कहानी कब से अधूरी है,
लेकर क्षण भर श्वास, थोड़ी सुकून की। सुनता फिर, बॉस के मन की। लेकर क्षण भर श्वास, थोड़ी सुकून की। सुनता फिर, बॉस के मन की।
फिर भी सौन्दर्य है भरपूर, निष्काम सुख दुख से दूर। फिर भी सौन्दर्य है भरपूर, निष्काम सुख दुख से दूर।
एक फूलो का बाग हो बस हर फूल में खुशबू तेरी हो। एक फूलो का बाग हो बस हर फूल में खुशबू तेरी हो।
जहां ना पूछे कोई हाल मेरा बेशक ना करें परवाह मेरा रंग ढंग जहां ना पूछे कोई हाल मेरा बेशक ना करें परवाह मेरा रंग ढंग
आसान नहीं यूँ उसके साथ के बिना रहना आसान नहीं यूँ उसके साथ के बिना रहना
मैंने जान लिया है कि मन मे बिखराव होने पर न तो कविता बनती है और न कहानी भी....... मैंने जान लिया है कि मन मे बिखराव होने पर न तो कविता बनती है और न कहानी भी.........
ये मेरे प्यार से ज्यदा मेरे बुरे वक़्त का इंतजार करती है। ये मेरे प्यार से ज्यदा मेरे बुरे वक़्त का इंतजार करती है।
उठी निगाह मुझ पर देती उमंग आमंत्रण की रवानी उठी निगाह मुझ पर देती उमंग आमंत्रण की रवानी
क्या हूँ मैं एक तालाब जिसमें हर वक्त हलचल होती रहें क्या हूँ मैं एक तालाब जिसमें हर वक्त हलचल होती रहें
क्या पता कब आखिरी पल जियो तुम ! क्या पता कब आखिरी पल जियो तुम !
मोबाइल की गिरफ्त में तुम हो, अब तुम्हारे हाथों से मैं शायद आज़ाद हूँ। मोबाइल की गिरफ्त में तुम हो, अब तुम्हारे हाथों से मैं शायद आज़ाद हूँ।