Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

दयाल शरण

Abstract

3  

दयाल शरण

Abstract

मन

मन

1 min
459


जाने कैसे 

करवट

बदल रहा है,

मन है गोया

मौसम है

गुम-सुम रहकर

सब-कुछ

बोल रहा है,

जाने मन के 

कैसे तेवर हैं।।


जाने कैसे

वक्त की 

अंगुली 

पकड़े वह

चल निकला

जाने कैसे 

वह खुद

खूब लड़ा 

बलाओं से।।


जाने कैसे 

बट वृक्ष की

हरितिमा 

ओढ़ी

उसने

फिर जाने 

कितनों की

छांव बना

अंगारों में।।


स्वांस और

आस में 

जाने कितना

प्यारा रिश्ता है

इक के रहते

दूजा यूं निराश

हुआ कैसे।।


फिर बरसेंगे

मेघ

घटा फिर छाएगी

सूखी झील में

छम-छम पानी

बरसेगा

प्यास बुझेगी

आस जो

शब्द उकेरेगी

व्याकुलता तो हो

पर मन यूं उदास

हुआ कैसे!!!!


स्वांस थी

आस थी

इनमें

जाने कितना

प्यारा रिश्ता था

इक के रहते

दूजा यूं निराश

हुआ कैसे।।



Rate this content
Log in