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V. Aaradhyaa

Abstract Inspirational Thriller

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V. Aaradhyaa

Abstract Inspirational Thriller

मन क्यों आसक्त रहता पगले

मन क्यों आसक्त रहता पगले

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भला क्यों आसक्त रहता मन विलास के लिए :

जीवन व्यर्थ गंवा रहा पगले झूठी आस के लिए !


अद्भुत आकर्षण कामिनी की प्यारी अदाओं में :

मन खग बसता उसके शरीर की कंदराओं में !


अधरों पे मुस्कान उसकी जैसे खिली चमन कली :

मुख कांति मनोहारी देख बाँछें जाती हैं खिली !


रूप मोहनी उसकी हर पल लुभाती कुछ ऐसे :

सिर झुकाए हुए कुमोदनी को चन्द्र लुभाए जैसे !


मुक्ति का मार्ग यह कदापि नहीं हो सकता प्रिय :

मत कामना के पीछे भागो बाद में लगे जो अप्रिय !


शांति मिले ज़ब ईश्वर अपनी चरण शरण बिठावै :

अन्तर्मन व रोम रोम में बस दीनानाथ बस जावै !


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