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Sunil Gupta teacher

Tragedy

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Sunil Gupta teacher

Tragedy

मजदूरन की दशा

मजदूरन की दशा

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लिये भार अपने बच्चे का,

भार उठाने जाती है।

हाथ पैर लकड़ी जैसे,

मन भर बोझ उठाती है।।


१- पति डला है घर में उसके,

 कमा कमा के लाती है।

 इतना सब कुछ करती ही है,

 संग पिटाई खाती है।


 २-बुरी नजर जमींदार भी रखता, 

    कहता घर क्यों जाती है।

    छोड़-छाड़ घर वाले को तू,

    क्यों मरने खपने जाती है।


 ३-पति को माने परमेश्वर ही,

 यही सोच सह जाती है।

 चलती है कोल्हू की नाईं,

तनिक न वो सुस्ताती है।


 ४- अपने बच्चे की खातिर वो,

    सारे कष्ट उठाती है।

 आह निकलती कभी न मुख से,

     जीती ऐसे जाती है।।



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