STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

3  

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

मिटे हुए लोग

मिटे हुए लोग

1 min
43

जिनकी भावनाओं

से खिलौने की तरह हरदम खेला गया हो 

वो भला किसी की भावनाओं से क्या खेलेंगे 

किसलिए खेलेगे और क्यों कर खेलेंगे?

पाएंगे क्या उससे सिवाय जाने पहचाने खाली पन के?!


वो तो भरपूर भरा होगा न पहले से ही उनमें 

खेलने को 'कुछ तो 'होना चाहिए न उनमें

जबकि बचा है उसके अंदर सिर्फ शून्य !

जिसका निर्वात निरन्तर उन्हीं की भावना को निगलता 

उगलता रहता है!


मिटे हुए लोग,

मिटते रहते हैं खुद में ही, किसी को मिटाया नहीं करते।

न वे उम्मीद भी रखते किसी से,बचा लिए जाने की।

वे बस कोशिश करते हैं,जीते हैं अपनी तरह से,

अपने लिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy