STORYMIRROR

SUNIL JI GARG

Comedy Drama Fantasy

4  

SUNIL JI GARG

Comedy Drama Fantasy

मिली मुझे सुपरपावर

मिली मुझे सुपरपावर

1 min
395

थका हुआ उस रोज़ था काफी

जल्दी सो गया ओढ़ के चादर

जल्दी लगा देखने  सपने

मिल गई मुझे थी सुपर पावर


दूजे के मन की बात मैं यूं ही

लगा जानने देख के चेहरा 

पत्नी के मन को पहले देखा

वो पढ़ लेती थी चेहरा मेरा


उसके सुंदर से मुखड़े पर

चिंताएं मन की दिखतीं थी

सबसे ज़्यादा बच्चों की थीं

जो वो मुंह से न कहती थीं


फिर से मैंने ये प्रयोग किया

ऑफिस में बॉस को किया रीड

बड़ा शातिर था वो, पता लगा

कोई उसकी थी अलग नीड


मैंने झट से फिर यही पावर

उसकी सेक्रेटरी पर अपनाई

किस्सा सचमुच था मजेदार

भेद की बात मैंने पता लगाई


ऑफिस में चल रही थी गड़बड़

सुपर पावर से मैंने पता किया

जोर से हिलाकर और डांटकर

मेरी पत्नी ने मुझको जगा दिया


ये सपने में मिली थी सुपरपावर

सपने तक ही रही अच्छा हुआ

वरना कितने और होते काण्ड

अब मन फिर से मेरा सच्चा हुआ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy