Karuna Atheya
Classics
भाया जोग,
छोड़ा भोग।
लागी प्रीत,
कान्हा मीत।
जागे पीर,
नैना नीर।
देखे मीत,
गाये गीत।
लेती नाम,
मीरा, श्याम।
सच्चा सार,
होता प्यार।
पूजे ईश,
देवाशीष।
छूटी साँस,
पूरी आस।
चाहा श्याम,
पाया नाम।
मीरा प्रीत,
सच्ची रीत।
मच्छर
बेटी
रिश्ते
मीरा
मृत्यु
बनारस
नेहाशीष
वेदना
जीवन लगता प्य...
मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ मगर मन में हैं कुछ सवाल जो तुमसे पूछ नही पाता हूँ
सुनो... ए निद्रासन में आसीन यशोधरा। सुनो... ए निद्रासन में आसीन यशोधरा।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान कृष्ण बैठे हुए थे।
ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बंद हो गई नाग और चन्... ठहर पाई नहीं कश्ती उस कयामत के सैलाब में थी दोनों की साँसे उफान पर और आँखें बं...
श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें। श्री कृष्ण का चिंतन करती रहें वाणी से लीलाओं का गान करें।
भक्ति और प्रेम ब्रजवासियों का वहाँ देखा जो सुनाया उनको भक्ति और प्रेम ब्रजवासियों का वहाँ देखा जो सुनाया उनको
तदनंतर वो मछलियों के साथ में मछुआरों के जाल में फँस गया। तदनंतर वो मछलियों के साथ में मछुआरों के जाल में फँस गया।
शिखंडिनी का था वह नव शिखंडी पुरुष रूप। किंतु यक्ष ने लिंग विनिमय से धरा स्त्री स्वरूप शिखंडिनी का था वह नव शिखंडी पुरुष रूप। किंतु यक्ष ने लिंग विनिमय से धरा स्त्...
वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में। वही द्रोण नन्द हुए और धरा जन्मीं यशोदा के रूप में।
भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ। भगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव जो कुछ कहा तुमने मुझसे मैं वही करना चाहता हूँ।
कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल । कुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल ।
तभी तो पाँव पखारे नारद के चरणामृत अपने सिर पर धारण किया तभी तो पाँव पखारे नारद के चरणामृत अपने सिर पर धारण किया
प्राणियों पर कृपा करने के लिए मैंने अवतार ग्रहण किया ये प्राणियों पर कृपा करने के लिए मैंने अवतार ग्रहण किया ये
शक्ति आजमाने को अपनी, महिषासुर था आतुर सा। शक्ति आजमाने को अपनी, महिषासुर था आतुर सा।
द्वारवासी बहुत प्रसन्न थे बहुत बड़ा स्वागत हुआ उनका। द्वारवासी बहुत प्रसन्न थे बहुत बड़ा स्वागत हुआ उनका।
किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित। किया हर युग में, कितना अपमानित, कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित।
प्रियतम, आप कुछ दिन यहाँ रहकर मेरे साथ क्रीड़ा कीजिए प्रियतम, आप कुछ दिन यहाँ रहकर मेरे साथ क्रीड़ा कीजिए
अहो ! धिक्कार हम सबको धनुष धारण कर खड़े हम रहे अहो ! धिक्कार हम सबको धनुष धारण कर खड़े हम रहे
आपके चरणकमलों में लगा रहे मेरा चित, ये कृपा कीजिए। आपके चरणकमलों में लगा रहे मेरा चित, ये कृपा कीजिए।
*हे ! नाथ अनाथ पड़ा जग में , तन जर्जर मोहि सतावत है. *हे ! नाथ अनाथ पड़ा जग में , तन जर्जर मोहि सतावत है.