STORYMIRROR

Karuna Atheya

Abstract

4  

Karuna Atheya

Abstract

मृत्यु

मृत्यु

1 min
402

मृत्यु सच है, शाश्वत, चिरन्तर,

उत्सव है यह तो जीवन का।

सत्य उजागर यह ,गीता में,

बनी, मृत्यु उद्गम जीवन का।


मृत्यु किसी की जब होती है,

कौन बात उसकी करता है ?

सब रोते अपने मतलब से,

कौन मृत्यु का दुख हरता है ?


करते उत्सव सी तैयारी,

कमी नहीं कुछ रहने देते।

कमी रहे जीते जी चाहे,

अब रिजर्व कमरे कर देते।


मैन्यू बनता, लंच,डिनर का,

संग चाय के नाश्ता होता।

अजब तमाशा, दिखता कैसा ?

घर मे ज्यों उत्सव सा होता।


ഈ കണ്ടെൻറ്റിനെ റേറ്റ് ചെയ്യുക
ലോഗിൻ

More hindi poem from Karuna Atheya

मच्छर

मच्छर

1 min വായിക്കുക

बेटी

बेटी

1 min വായിക്കുക

रिश्ते

रिश्ते

1 min വായിക്കുക

मीरा

मीरा

1 min വായിക്കുക

मृत्यु

मृत्यु

1 min വായിക്കുക

बनारस

बनारस

2 mins വായിക്കുക

नेहाशीष

नेहाशीष

1 min വായിക്കുക

वेदना

वेदना

1 min വായിക്കുക

Similar hindi poem from Abstract