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Arun Gode

Abstract Inspirational

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Arun Gode

Abstract Inspirational

महाराणी अहिल्या बाई.

महाराणी अहिल्या बाई.

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जीजाऊ ,येसु, तारा और अहिल्याबाई, 

सभी थी मराठा साम्रज्य की वीरांगना।

सभी की थी अपनी खूबी व अनोखी पहचान, 

लेकिन अहिल्या के बसे थे जनसेवा में प्राण। 


कई सदियों बाद भी अहिल्या की कायम हैं पहचान, 

लोकमाता, राजमाता , विरांगणा ,पुण्यश्र्लोक,

देवी, गंगाजल, निर्मल, मातोश्री से आज भी संबोधन,

क्योंकि जनहित के उसके देश कार्य थे वास्तविक महान। 

  

राजमाता जीजाऊ के नक्शे कदमों पर चलकर, 

पति के देहांत के बाद नहीं चढ़ी थी वह सती।

मृत परंपराओं की वह कभी नहीं चढ़ी बली, 

वतन के सुरक्षा के लिए युद्ध से खुद ही लड़ी।


पिता से बचपन में ही की स्कूली व अस्त्र शिक्षा ग्रहण,

युद्ध व प्रशासन में पति कार्य में उसका समान योगदान।  

मालेराव, मुक्ताबाई थी अहिल्या की दो निपुण संतान, 

सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण था उसका अल्प विवाहित जीवन। 


लेकिन जिंदगी में अचानक आया सतत दुखदायी तूफान, 

पति के कुछ अरसे बाद ही जवान पुत्र भी हुआ निष्प्राण। 

विपदा में नहीं खोया अपना कभी संयम, विवेक व संतुलन, 

आपदा में अवसर समझकर संभाली थी राज्य की कमान।


जैसे –तैसे सँभाला था होश, परिवार व राज्य प्रशासन, 

कुदरत ने ससुर का छत्र उठाकर किया उसे अंगहीन।  

चोंदी महाराष्ट्र की बेटी ने नहीं छोड़ा संकटों का दामन,  

धैर्य, विवेक से किया था मुसीबतों का हमेशा समापन।  

 

गंभीर मुसीबतों को झेलना ही था उसका जीवन, 

जन कल्याणकारी राज्य का किया उसने निर्माण। 

अपने गम, खुशी, समस्याओं को भूलकर उसी क्षण,  

जनसेवा में किया अपना सारा शेष जीवन अर्पण। 


गरीबों, फकीरों, प्रवासियों के लिए अन्नछत्रीयों का प्रयोजन, 

यथार्थ सनातन धर्म में थी अहिल्या की गहरी श्रद्धा व मन। 

मंदिरों के साथ-साथ कई दर्गों का भी किया देश में निर्माण, 

वास्तुकला प्रेमी ने महेश्र्वर राजधानी का दिल से किया गठन।

  

सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक गतिविधियां थी गतिमान, 

जन कल्याणकारी कार्यों का भी रखा सर्वत्र उचित ध्यान।  

जगह –जगह कई कुंओं, नदी घाटों का किया था निर्माण, 

देश में अनेक तीर्थस्थलों पर धर्मशाला व घाटों का गठन।



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