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Preeti Goyal

Abstract

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Preeti Goyal

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जुदाई

जुदाई

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ग़म बहुत है दुनिया मे 

पर सबसे जुदा जुदाई का ग़म 

सब दर्द सहे जाते है

पर ना सहा जाता है जुदाई का ग़म 


याद तुझे करके रोता है दिल 

होती है आंखे बार-बार ही नम

करके देखे मैंने इलाज कई ही 

पर ये है लाइलाज ना होता कम


इस मर्ज का इलाज ना कहीं और 

बस मरहम है एक तेरे पास ही सनम 

लौटकर तू आजा एक बार सही 

ग़म-ए-जुदाई अब कर दे तू ख़त्म।


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