Sandeep Sharma
Horror
खुशियां नहीं होंंगी कम
महामारी कुचल देंंगे हम।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
खा लिया हैं चोट दिल ने बह रहे अब आंसू की धार। खा लिया हैं चोट दिल ने बह रहे अब आंसू की धार।
फिर मास्क लगाकर बाहर निकलते सब, इस तरह ही बच पाते हैं वायरस से ! फिर मास्क लगाकर बाहर निकलते सब, इस तरह ही बच पाते हैं वायरस से !
बीता काल कोरोना , करके सब वीरान भले चंगे गिरफ्त लिए , खूब बना शैतान। बीता काल कोरोना , करके सब वीरान भले चंगे गिरफ्त लिए , खूब बना शैतान।
दरख्तों के साए भी धूप लगती है, बिन पानी के भी प्यास बुझती है। दरख्तों के साए भी धूप लगती है, बिन पानी के भी प्यास बुझती है।
जिनमें कितनों की मौत के फ़रमान होते हैं संदेशों में जिन शिकारों के नाम होते हैं, जिनमें कितनों की मौत के फ़रमान होते हैं संदेशों में जिन शिकारों के नाम होते ह...
क्या हुआ आपको, क्या हुआ आपको फेकू जी, फेकू जी क्या हुआ आप को क्या हुआ आपको, क्या हुआ आपको फेकू जी, फेकू जी क्या हुआ आप को
दिया हुआ है दिया हुआ है
जिनके चेहरे नजर नहीं आते थे... जो भटकते हुए नज़र आते थे... जिनके चेहरे नजर नहीं आते थे... जो भटकते हुए नज़र आते थे...
हमपे कर्ज है अपने वतन का यह , दो पल की जिंदगी।। हमपे कर्ज है अपने वतन का यह , दो पल की जिंदगी।।
शहर के उस पार उस सुनसान हवेली में नहीं जाता कोई पूर्णमासी रात में। शहर के उस पार उस सुनसान हवेली में नहीं जाता कोई पूर्णमासी रात में।
वो तब आया रूह बनकर जब मैं भी रूह बन गया।। वो तब आया रूह बनकर जब मैं भी रूह बन गया।।
यूँ तो दिखता सही सलामत हूँ पर ओ डरावनी बातें दिल को दहला गयी है। यूँ तो दिखता सही सलामत हूँ पर ओ डरावनी बातें दिल को दहला गयी है।
समय- समय पर उनके सन्देश आते हैं जिन्हें भेड़िए अपनी भाषा में कई जगह पहुंचाते हैं समय- समय पर उनके सन्देश आते हैं जिन्हें भेड़िए अपनी भाषा में कई जगह पहुंचाते ...
जो उनके खून- पसीने की कीमत से उपजाई गई है। जो उनके खून- पसीने की कीमत से उपजाई गई है।
लेकिन याद रखना.... गया अगर अंधेरे में तो छोड़ कर तुझे चली जाऊँगी। लेकिन याद रखना.... गया अगर अंधेरे में तो छोड़ कर तुझे चली जाऊँगी।
हर मनुष्य को एक ना एक दिन मरना ही है। हर मनुष्य को एक ना एक दिन मरना ही है।
खुशी -खुशी से करो राम -राम, ना बने किसी से तो भी भेजना पैगाम। खुशी -खुशी से करो राम -राम, ना बने किसी से तो भी भेजना पैगाम।
हाथ पकड़ कर एक दूसरे का लंबी डोर जैसी हमारी पंक्ति। हाथ पकड़ कर एक दूसरे का लंबी डोर जैसी हमारी पंक्ति।
जहाँ नित -प्रतिदिन हो रहे हैं विश्वास के रिश्तों का खून। जहाँ नित -प्रतिदिन हो रहे हैं विश्वास के रिश्तों का खून।
एहतियात रखना की अभी है मजबूरी दो ग़ज़ की दूरी और मास्क है ज़रूरी। एहतियात रखना की अभी है मजबूरी दो ग़ज़ की दूरी और मास्क है ज़रूरी।