Sandeep Sharma
Horror
खुशियां नहीं होंंगी कम
महामारी कुचल देंंगे हम।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा। बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा।
नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।। नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।।
ऐ किस्मत मेरे साथ, तेरा क्या गिला था वो आखरी बार मुझे बिस्तर पर मिला था।। ऐ किस्मत मेरे साथ, तेरा क्या गिला था वो आखरी बार मुझे बिस्तर पर मिला था।।
जल, थल, नभ सर्वत्र इंसानी करतब लोभ, लालच में भूल चुका रिश्ते, सब जल, थल, नभ सर्वत्र इंसानी करतब लोभ, लालच में भूल चुका रिश्ते, सब
कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से। कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से।
मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया
यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए यूँ बड़ी मैं क्यूँ हुई के सब लुटेरे बन गए
गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू। गहरी काली रात ने दिखलाया, एक बार फिर अपना जहरीला जादू।
परवाह सँग दे वो हौसला उपहारी कोई अरदास है। परवाह सँग दे वो हौसला उपहारी कोई अरदास है।
नींद आती होगी कि नहीं॥ नींद आती होगी कि नहीं॥
बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था। बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था।
खून की प्यासी उसकी आत्मा किसी मासूम को अपना शिकार न बना ले। खून की प्यासी उसकी आत्मा किसी मासूम को अपना शिकार न बना ले।
त्रेता में श्रीराम तब आये थे, त्रेता में श्रीराम तब आये थे,
मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका। मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका।
पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है। पर इस घटना ने दोनों के दिमाग पर गहरा असर किया है।
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं। बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं।
जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे जो कल तक आँखों में ख़्वाब सजाकर खुशियाँ बांटा करते थे
आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है
माननीय आविष्कार और मानव की भूल से हुआ हादसा करुण। माननीय आविष्कार और मानव की भूल से हुआ हादसा करुण।