STORYMIRROR

Awadhesh Uttrakhandi

Classics Inspirational Others

3  

Awadhesh Uttrakhandi

Classics Inspirational Others

महादेव

महादेव

1 min
1

महादेव शम्भु निराला है जग में।
मेरा परम् जो गुरु और पिता भी वही,
महादेव शम्भु भोले भाला है जग में।
तिरशूल धारी डमरू के ज्ञाता 
निकले है जिनसे अक्षर बिख्याता।
महदेव मेरे परम् हितेषी कृपा के 
सिंधु है लिपटे रहते भुजंग बिकराला 
महादेव शम्भु निराला है जग में 
मेरा परम् जो गुरु और पिता भी वही,
महादेव शम्भु भोलेनाथ मेरे हे साथी।
अवधेश उत्तराखंडी 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics