Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Deeksha Chaturvedi

Romance Others

3  

Deeksha Chaturvedi

Romance Others

मेरी संगिनी

मेरी संगिनी

1 min
282


इक शोर है जो कानों में घुलता है

इक शोर है जो दिल में उठता है

सरगोशियों की आहटें गूँजती हैं

ख़ामोशियों के बीच एक आवाज़ उठती है

उसके आँसुओं से दिल दहल जाता है

कब वो मुंह खोलकर शिकायत करती है

ऐसा हमसफर कब किसी को मिलता है

मुझे वो मिली है ये मेरा ही मुकद्दर है

कौन इस ज़माने में साथ देता है

खाली जेबों के साथ दर बदर भटकता है

बस चेहरे पर मुस्कान रहती है

सच कहूँ तो इसकी वजह मेरी संगिनी है

जो हर कदम पर मेरे साथ रहती है


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance