STORYMIRROR

Sandhya Sharma

Tragedy

4  

Sandhya Sharma

Tragedy

मेरी राष्ट्र भाषा - हिंदी

मेरी राष्ट्र भाषा - हिंदी

1 min
548


हिंदी माथे की बिंदी है,

भारत के माथे पर सजती है,

ये गौरव है, मेरे देश का,

हर देश मैं जानी जाती है।

कहते हैं कुछ लोग इसे,

अनपढ़ लोगों की भाषा है,

अज्ञानी हम कहे उन्हें ,

ये सबसे मेरी आशा है।

हिंदी से एम् ए करना तो,

जैसे कोई महा - पाप किया,

हर दिन हम ताने सुनते हैं,

क्यों साईंस - साइड नहीं लिया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy