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Sri Sri Mishra

Inspirational

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Sri Sri Mishra

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मेरी मां

मेरी मां

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वो धुआंँ, चूल्हा तेरे हाथों का छाला

झंझावात की मुसीबतों में जीवन के ताने-बाने का जाला

कसैली जिंदगी की कड़वाहट में तू फिर भीअमृत का प्याला

ऐ मालिक उस अमृत की बूंँद की

मिठास मेरे मुख में बनाए रखना

वह तेरे आंँचल की हरियाली

मेरी तोतली बोली की काँव

घुटनों के बल रेंग- रेंग कर

कब खड़ा हुआ अपने पांँव

ऐ मालिकउस मातृत्व की छांँव मेरे ऊपर बनाए रखना


लाख कमा लूँ कितनी भी धन और दौलत

किंतु मांँ के एक रुपए की वह हाथों की मीठी मोहलत

काम ना आऊँ उसके तो मुझ पर है लानत

ऐ मालिक यह अमीरी की जागीर मुझ पर बनाए रखना

उसके संस्कारों से मैं बड़ा हुआ


पहचान आज मेरी दुनिया को अस्तित्व का हुआ

लेकिन उसकी गोदी में मैं फिर से उसी उम्र का हुआ

ऐ मालिक उस जन्नत की गोद की अमीरी मुझ पर बरसाए रखना

यह उसी के पालन-पोषण का है नतीजा


जो यह चमन महक से गुलशन हुआ

ऐ मालिक मुझ छोटी क्यारी के उस माली को बनाए रखना।


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