STORYMIRROR

Sri Sri Mishra

Inspirational

4  

Sri Sri Mishra

Inspirational

याद

याद

1 min
272

यादों के झरोखे से जब झांँका

जे़हन में उभरा स्नेह का वो खाका

आंँखों में भर आए प्यार के आंँसू

थी जो बृहद परिवार की मांँ सासु


हर कदम पर सुंदर सीख देना

गलतियों को मेरी अपने आंँचल में छुपा लेना

बच्चों पर वह छत्रछाया प्यार के फ़ुहारों की

आशीष बन कर आज हैं शीश पर बौछारों की


मजबूत डोर सी होती है यह जिंदगी

धोखा देकर कर जाती है बंदगी

काश! उनके हिस्से में कुछ और दिन होते

बैठकर साथ उनके थोड़ा और खिलखिला लेते


आज हाथों के कंगन उनकी याद दिलाते हैं

स्मरण के वो पल याद बनकर आज मुस्कुराते हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational