मेरे साथ-साथ चलता है
मेरे साथ-साथ चलता है
मैं कितना अकेला हो गया हूँ
शायद इसका तुम्हें अंदाज़ा भी न हो
वक़्त निरंतर बीतता जा रहा है
और मैं वक़्त के पीठ पर बैठ कर
चुप-चाप बस चलता जा रहा हूँ
कहाँ जाना है ?
कहाँ जा रहा हूँ ?
इस बात से मैं बिल्कुल अनजान हूँ
बे-मन हीं अपने जीवन
को मैं जिए जा रहा हूँ
जी भी रहा हूँ या नहीं
इसका भी पता नहीं चलता
कभी-कभार मेरे चेहरे पर
हँसी तो आ जाती है
पर ख़ुशी का चेहरा
कैसा होता है ?
कैसा था ?
ये मैं बिल्कुल भूल गया हूँ
हाँ ! दुःख जरूर हर वक़्त
मेरे साथ रहता है
मेरे साथ-साथ चलता है और
उस दुःख का चेहरा
हू-ब-हू मेरे जैसा लगता है।
