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Kumar Gaurav Vimal

Abstract Children Stories Drama

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Kumar Gaurav Vimal

Abstract Children Stories Drama

मेरे पापा....

मेरे पापा....

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डर लगता नहीं इन राहों पर,

ये सफ़र मेरे लिए अंजान नहीं...

हैं मोड़ नहीं कोई इस डगर पर,

मेरे पापा की जिस से पहचान नहीं...

जुड़ गया है ये जीवन से मेरे,

शामिल हो गया है मेरी चाहत में...

आशीर्वाद से मेरे पापा के,

ये कानून मिली है मुझे विरासत में...


हूँ ख़ुशनसीब की ख़ुश करने का,

मौक़ा मिला है मुझे अपने पापा को...

दुआ करता हूँ की इस कोशिश में,

हर दिन कुछ नया इज़ाफ़ा हो...

एक मुक़ाम हासिल मैं कर पाऊँ, 

मेरे पापा के बनाए इस रियासत में...

आशीर्वाद से मेरे पापा के,

ये कानून मिली है मुझे विरासत में...


वकालत झलकें हर अंदाज़ में,

जुड़ जाए रिश्ता इस से खून का...

हर रोज़ एक नए जोश के साथ,

नया किस्सा लिखूँ मैं कानून का...

तज़ुर्बे से मेरे पापा के,

हर मुश्किल आये मेरे हिरासत में...

आशीर्वाद से मेरे पापा के,

ये कानून मिली है मुझे विरासत में...


जुड़ गया है ये जीवन से मेरे,

शामिल हो गया है मेरी चाहत में...

आशीर्वाद से मेरे पापा के,

ये कानून मिली है मुझे विरासत में...


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